यहूदी धर्म, दुनिया के सबसे पुराने धर्मों में से एक माना जाता है. इस धर्म का इतिहास करीब 3,000 साल पुराना बताया जाता है. यहूदियों का ऐसा भी कहना है कि यहूदी धर्म की शुरुआत यरुशलम से ही हुई थी. इस धर्म की नींव पैगंबर अब्राहम ने रखी थी...जानकार आपको हैरानी हो सकती है लेकिन अब्राहम को ईसाई और मुस्लिम भी यहां ईश्वर का दूत कहते हैं.
पैगंबर अब्राहम के बेटे का नाम आईजैक था औरर उनके एक पोते का नाम याकूब था. याकूब का ही दूसरा नाम इजरायल था और इसीलिए यहूदी धर्म के लोगों ने अपने देश को इजरायल नाम दिया. याहूदियों को दुनियाभर में सबसे ज्यादा चालक और शार्प माना जाता है.
लेकिन इजरायल को अपना देश बनाने के लिए यहूदियों ने बहुत कुर्बानियां दी हैं. करीब 2200 साल पहले पहले यहूदी राज्य अस्तित्व में आया था. लेकिन 931 ईसा पूर्व में इस राज्य का धीरे-धीरे पतन होने लगा. इसके बाद इजरायल दो हिस्सों में बंट गया इजरायल और यूदा.
इसके बाद 700 ईसा पूर्व में असीरियाई साम्राज्य ने यरुशलम पर हमला किया और इस हमले के बाद यहूदियों के 10 कबीले तितर-बितर हो गए...बहुत लोगों का पलायन भी हुआ. 72 ईसा पूर्व में रोमन साम्राज्य ने यरूशलम में हमला किया जिसके बाद इजरायल से भागकर यहूदी दुनियाभर में इधर-उधर जाकर बस गए और इसके साथ ही इजरायल राज्य भी खत्म हो गया.
ये वो समय था जब यहूदी इजरायल को छोड़ चुके थे और यहां फलस्तीनी अरबों का राज था. यानि इतिहास में झांककर देखें तो फलस्तीनों ने यहूदियों को अपने देश को छोड़ने पर मजबूर किया था.
लेकिन करीब 100 साल पहले यानि प्रथम विश्व युद्ध में उस्मानिया सल्तनत की हार के बाद मध्य-पूर्व में फलस्तीन के नाम से पहचाने जाने वाले इजरायल के हिस्से को ब्रिटेन ने अपने कब्जे में ले लिया था. इस इलाके पर ब्रिटेन के कब्जे के बाद बहुसंख्यक अरब और यहां कम संख्या में बचे यहूदियों के बीच हिंसा शुरू हो गई.
हिंसा को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दखल दिया और साल 1917 में ब्रिटेन ने बाल्फोर की घोषणा कर दी. इसके तरह यहूदियों के लिए एक अलग देश बनाने का वादा ब्रिटेन ने किया, ब्रिटेन की इस घोषणा के बाद फलस्तीनी और नाराज हो गए और फिर हिंसा हुई जिसमें बहुत सारे लोग मारे गये थे.
इसके बाद दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जब जर्मनी के तानाशाह एडॉल्फ हिटलर ने करीब 60 लाख यहूदियों का कत्लेआम किया, तो पश्चिमी देशों से ज्यादातर यहूदी अपने देश की चाह में फलस्तीन यानि की इजरायल आ गए. 1947 में संयुक्त राष्ट्र में फलस्तीन को यहूदियों और अरबों में बांटने को लेकर मतदान हुआ और यरुशलम को एक अंतरराष्ट्रीय शहर बनाया गया.
हालांकि, जब इसे भी फलस्तीनियों ने स्वीकार नहीं किया तो ब्रिटिश शासकों ने इस इलाके को मुक्त कर दिया और ये वही समय था जब यहूदी नेताओं ने इजरायल नाम का देश बनाने की घोषणा कर दी.
मध्य पूर्व के इस्लामिक देशों ने इसे कभी नहीं स्वीकारा जिसकी वजह से लगातार समय समय पर यहूदी यौर अरब मुस्लिमों के बीच झड़प होती रही.
इस बीच इजरायल ने खुद को मजबूत कर लिया. 1967 में इजरायल ने सीरिया, जॉर्डन और फिलिस्तीनियों से युद्ध लड़ा तो पूर्वी यरुशलम और वेस्ट बैंक जिसमें गाजा इलाका भी शामिल है यहां कब्जा कर लिया.
यानी ये दोनों इलाके जो जॉर्डन के पास थे, वो इजरायल ने उससे छीन लिए, और तभी से इन इलाकों में इजरायल और फलस्तीनियों के बीच हिंसक टकराव होता रहता है. इजरायल दावा करता है कि पूरा यरुशलम उसकी राजधानी है जबकि फिलिस्तीनी पूर्वी यरुशलम को भविष्य के फिलिस्तीन राष्ट्र की राजधानी मानते हैं. तो यहां पर पूरा विवाद यरुसलम को लेकर ही है.
फिलस्तीनी और इजराइली याहूदी दोनों यरुशलम पर अपना अधिकार होने का दावा करते हैं. इसी को हासिल करने के लिए यहां पर कुछ चरमपंथी जिन्हें इजरायल अतंकवादी संगठन घोषित कर चुका है, ये संगठन हिंसा फैलाते हैं. इसी हिंसा का परिणाम है हाल में एक बार फिर से दोनों के बीच तनाव है.

